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क्या शिक्षा विभाग में ‘रिश्वत दो और काम करवाओ’ का सिस्टम? — महिला शिक्षिका की शिकायत ने खोली अंदरूनी व्यवस्था की पोल

“पैसे दो वरना परेशान हो जाओगे…”

गौरेला शिक्षा विभाग में रिश्वतखोरी का बड़ा आरोप, एरियर्स के लिए शिक्षिका से 5 हजार वसूली का दावा

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गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही। जिले के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक और विस्फोटक मामला सामने आया है। इस बार आरोप सीधे विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय गौरेला पर लगे हैं, जहां एरियर्स भुगतान के नाम पर शिक्षिका से कथित रूप से रिश्वत मांगने और मानसिक प्रताड़ना देने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायत सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

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शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला झगराखांड में पदस्थ शिक्षिका कविता भतपहरी ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए आरोप लगाया है कि सितंबर 2021 में नियुक्ति और तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने के बावजूद आज तक उन्हें एरियर्स राशि का भुगतान नहीं किया गया। जबकि उनके साथ नियुक्त अन्य शिक्षकों को मार्च 2025 में ही राशि जारी कर दी गई थी।

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सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि शिक्षिका ने अपनी शिकायत में साफ लिखा है कि जब उन्होंने बार-बार एरियर्स भुगतान की मांग की तो बीईओ गौरेला डॉ. संजीव शुक्ला उन्हें लगातार शाखा प्रभारी मीना मरावी के पास भेजते रहे। वहां कथित रूप से उनसे कहा गया कि “काम कराना है तो पैसे देने होंगे।”

शिकायत में यह भी उल्लेख है कि शाखा प्रभारी मीना मरावी ने कथित रूप से कहा कि “BEO साहब के कहने पर” पैसे देने पड़ेंगे। शिक्षिका का आरोप है कि अतिरिक्त वेतन वृद्धि और एरियर्स राशि जारी कराने के नाम पर उनसे 5 हजार रुपये लिए गए। इतना ही नहीं, शिक्षिका ने दावा किया है कि इस पूरे लेन-देन और पैसों की मांग से जुड़े साक्ष्य भी उनके पास मौजूद हैं। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब शिकायत में यह आरोप भी सामने आया कि BEO कार्यालय से उन्हें कथित रूप से धमकी दी गई —

“पैसे नहीं दोगे तो परेशान हो जाओगे…”

एक महिला शिक्षिका द्वारा लगाए गए ये आरोप पूरे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं। आखिर क्यों एक कर्मचारी को अपने ही वैधानिक भुगतान के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं? क्यों फाइलें महीनों तक दबाकर रखी जाती हैं? और क्या बिना “सुविधा शुल्क” दिए विभाग में कोई काम नहीं होता ? विभागीय सूत्र बताते है की, शिक्षा विभाग में एरियर्स, समयमान वेतनमान, वेतन निर्धारण और अन्य भुगतान संबंधी फाइलों को लेकर लंबे समय से शिकायतें उठती रही हैं। कई कर्मचारी खुलकर सामने नहीं आते, लेकिन अंदरखाने “रकम दो और काम करवाओ” वाली संस्कृति की चर्चा आम रही है। अब पहली बार किसी शिक्षिका ने लिखित शिकायत देकर सीधे BEO कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

इस पूरे मामले ने जिले के प्रशासनिक सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में जिले में नए कलेक्टर की पदस्थापना के बाद प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शिता की बात कही जा रही है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या जिला शिक्षा अधिकारी इस शिकायत पर निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे या फिर मामला दबाने की कोशिश होगी।

यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एरियर्स भुगतान में देरी का नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग में फैले भ्रष्टाचार, वसूली तंत्र और कर्मचारियों के शोषण का बड़ा उदाहरण साबित हो सकता है।

फिलहाल जिलेभर के शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच यही चर्चा है “क्या शिक्षा विभाग में बिना पैसे दिए कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती…?”

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